टैंकर की टक्कर से मजदूर की मौत, अस्पताल की लापरवाही पर फूटा गुस्सा

जैसलमेर

शहर के औद्योगिक क्षेत्र द्वितीय चरण में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जिससे उसका पूरा परिवार शोक में डूब गया। घटना उस समय हुई जब तेज रफ्तार टैंकर ने पीछे से एक साइकिल सवार मजदूर को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल युवक को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल राजकीय नाहटा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकीय उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान 35 वर्षीय नरपतसिंह पुत्र राजूसिंह राजपुरोहित, निवासी जसोल के रूप में हुई है। मृतक मेहनतकश मजदूर था और अपने पीछे पत्नी, एक बेटा व दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है। इस दुर्घटना ने न केवल परिवार को, बल्कि पूरे राजपुरोहित समाज को भी गहरा आहत किया है।

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समय पर इलाज न मिलने का आरोप
मृतक के परिजनों और समाज के लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि नरपतसिंह को समय रहते समुचित उपचार मिलता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में प्राथमिक उपचार में देरी हुई, जिससे उसकी हालत और बिगड़ती गई और अंततः उसने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में राजपुरोहित समाज के लोग अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्र हो गए।

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मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे RLP नेता, सख्त कार्रवाई की मांग
स्थिति उस समय और गरमा गई जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के युवा नेता थान सिंह डोली देर रात मोर्चरी के बाहर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि घायल मजदूर को समय पर न तो उचित प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई और न ही आवश्यक संसाधन। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिम्मेदार डॉक्टरों और अधिकारियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो समाज और राजनीतिक संगठन मिलकर व्यापक आंदोलन करेंगे।

डोली ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है जब बालोतरा अस्पताल की लापरवाही ने किसी गरीब परिवार की खुशियां छीन ली हों। अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता गोविंद सिंह राजपुरोहित, उमेश कुमार सोनी और कांतिलाल राजपुरोहित भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि परिवार को न्याय दिलाने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे। बताया जा रहा है कि नरपतसिंह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी आकस्मिक मृत्यु से पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में डूब गया है।

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